विश्व मेला 1851 में लन्दन के हाइड पार्क में लगाया गया

मेलो का आयोजन कब शुरु होवा इस सम्बंद में कोई प्रमाणित जानकारी नही मिलाती है | लेकिन प्राचीनकाल में जब आवागमन के साधन नही थे , तब अपनी दैनिक रोजमेरा कि वस्तुओ क्र लिय दूर-दूर जाना पड़ता था तब व्यापारी सप्ताह के किसी एक विशेष दिन नियत स्थान पर रोजाना कि जरूरत कि वस्तुवो कि हाट लगते थे | लोग यहीं से जानवरों कि खल और अनाज दे कार के आवश्यकता कि वस्तुवे ले जाते थे |

                                 बाद में आवागमन के साधनों कि उन्नति होने पर मेलों का व्यापारिक महत्व कम होता गया और मेले आमोद-प्रमोद व सांस्क्रतिक उत्सवो के रूप में मनाये जाने लेगे

                               सभ्यता के विकास और ओद्योगिक उन्नति के बाद मेले किसी भी देश कि प्रगति व उपलब्धियों को प्र्देशित करने के माध्यम बन गये |

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           उन्निशवी शताब्दि में तो मेले अन्तराष्ट्रीय सहयोग और व्यापार का प्रतीक बन गये |

इन मेलो को विश्व मेलो के नाम से पुकारा जाने लेगा |

पहला विश्व मेला 1851 में लन्दन के हाइड पार्क में लगाया गया |

इसके लिए ‘ त्रिस्टल पैलेस ‘ नामक भवन का निर्माण किया गया |

यह भवन लोहे और कांच का बनाया गया था |

यह मेला 141 दिन चेला था |

इस में 60 लाख 39 हजार 195 लोगो ने देखा था |

1936 में आग लग जाने से यह इमारत नष्ट हो गई थी |

“भारत में एशिया-72 के नाम से दिल्ली के प्रगति मैदान में 1972 में विश्व मेले का आयोजन हुवा था,

जिसे करोड़ो लोगो  ने देखा था |”

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